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Covid Vaccination के 6 महीने: मोदी सरकार के दावों से दूर ही नजर आ रही हकीकत!
कोरोना संकट के दौर में मोदी सरकार की शीर्ष थिंक टैंक संस्था नीति आयोग ने बीती 13 मई को लोगों के लिए एक राहत देने वाली घोषणा की थी. नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने दावा किया था कि भारत में अगस्त से दिसंबर के अंत तक 216 करोड़ वैक्सीन डोज उपलब्ध कराई जाएंगी. इसी के साथ वैक्सीन का पूरा रोडमैप भी जारी किया था.
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वैक्सीनेशन पर केंद्र सरकार के दावों से कोसों दूर नजर आ रही है हकीकत!
भारत में पांच एंटी कोविड वैक्सीन अभी भी ट्रायल फेज में हैं. बायो-ई सबयूनिट वैक्सीन की 30 करोड़ डोज अगस्त से दिसंबर के बीच मिलनी हैं, लेकिन यह वैक्सीन ट्रायल के आखिरी दौर में है. जायडस कैडिला और नोवैक्स भी ट्रायल फेज के तीसरे दौर में हैं. वहीं, भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन और जेनोवा की वैक्सीन भी ट्रायल के शुरुआती दौर में हैं.
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Covid Vaccine के बनने और लापता होने की रहस्यमय कहानी!
भारत में टीकाकरण का औसत देश में एंटी कोविड वैक्सीन के घरेलू उत्पादन की तुलना में काफी कम नजर आता है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि भारत में आबादी के लिहाज से वैक्सीन की मांग बहुत बड़ी है, लेकिन टीकाकरण की गति सरकार द्वारा घोषित किए गए उत्पादन और आपूर्ति क्षमता की तुलना में काफी धीमी है.
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Covaxin vs Covshield vaccine: दो डोज के बीच में क्यों ज्यादा है टाइम गैप, जानिए
आईसीएमआर के हेड डॉ. बलराम भार्गव का कहना है कि कोविशील्ड वैक्सीन का पहला डोज लेने के साथ ही लोगों में एंटीबॉडीज बनने लगती हैं. कोविशील्ड वैक्सीन की दो डोज में टाइम गैप की वजह से लोगों में एंटीबॉडीज बड़ी मात्रा में बनती हैं. कोवैक्सीन के पहले डोज के बाद इम्यूनिटी उतनी नहीं बढ़ती और एंटीबॉडीज बहुत ज्यादा नहीं बनती हैं.
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कोविड वैक्सीनेशन से ब्लड क्लॉटिंग की बात टीकाकरण अभियान में पलीता लगाने से ज्यादा कुछ नहीं!
कोविशील्ड वैक्सीन को लेकर जारी की गई रिपोर्ट में बताया गया है कि वैक्सीनेशन की शुरुआत से लेकर अब तक देश के 684 जिलों से 23000 साइड इफेक्ट के मामले सामने आए हैं. जिनमें से 700 मामले गंभीर किस्म के थे. इन मामलों में 498 सीरियस और सीवियर मामलों की जांच के दौरान 26 मामलों में ब्लड क्लॉटिंग के केस मिले हैं.
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